Saturday, September 12, 2009

फरमाइश

ये सिर्फ़ रात का तक़ाज़ा नही
आज मौसम की अगुआईश है |

तन्हाई की अपनी क्या ही बात करूँ
हमेशा ही करी उसकी आज़माइश है |

आज तो कलम भी मेरी पूछ पड़ी
आज उसने भी की फरमाइश है |

दफ़्न कर दूँ हाल-ए-दिल दिल में अपने
ऐसी कहाँ इस इश्क़ की पैदाइश है |

कहने पे उनके लिख तो दिया आज मैंने फिर
कर दी पूरी फरियाद उनकी पूरी, मेरे में क्यों बाकी गुंजाइश हैं |