आज शब्द नहीं लिखने को, नहीं पता जज्बात क्या कहते हैं?
दिल में तू है इंकार नहीं, नहीं पता लब्ज-ए-दिल क्या कहते हैं?
इजहार-ए-मोहब्बत कब की कर दी हमने, सुने जवाब-ए-इश्क़ क्या कहते हैं?
बेसब्र बैठे हैं इंतज़ार में अंकुश, इसे ही पागलपन-ए-इश्क़ क्या कहते हैं?
दिल्लगी कर रहे सनम हमसे, इसे अदा-ए-सनम क्या कहते हैं?
ये अदा भी अजीज हमको, लोग हमसे हमारी नाम-ए-अदा क्या कहते हैं?
संभले जैसे भी तेरे इंकार से, बांधे जो अब भी ज़ंजीर-ए-तमन्ना क्या कहते हैं?
बिन तेरे जीने की दुआ दे दी, इसे ही दुआ-ए-क़त्ल-ए-मोहब्बत क्या कहते हैं?
इबादत तू, दुआ तेरी कबूल, फकत इतना और बता जा,
कोई पूछे पहचान मेरी तो, एक साँस लेते मुर्दे को क्या कहते हैं?
दिल में तू है इंकार नहीं, नहीं पता लब्ज-ए-दिल क्या कहते हैं?
इजहार-ए-मोहब्बत कब की कर दी हमने, सुने जवाब-ए-इश्क़ क्या कहते हैं?
बेसब्र बैठे हैं इंतज़ार में अंकुश, इसे ही पागलपन-ए-इश्क़ क्या कहते हैं?
दिल्लगी कर रहे सनम हमसे, इसे अदा-ए-सनम क्या कहते हैं?
ये अदा भी अजीज हमको, लोग हमसे हमारी नाम-ए-अदा क्या कहते हैं?
संभले जैसे भी तेरे इंकार से, बांधे जो अब भी ज़ंजीर-ए-तमन्ना क्या कहते हैं?
बिन तेरे जीने की दुआ दे दी, इसे ही दुआ-ए-क़त्ल-ए-मोहब्बत क्या कहते हैं?
इबादत तू, दुआ तेरी कबूल, फकत इतना और बता जा,
कोई पूछे पहचान मेरी तो, एक साँस लेते मुर्दे को क्या कहते हैं?