Saturday, April 30, 2016

क्या कहते हैं

आज शब्द नहीं लिखने को, नहीं पता जज्बात क्या कहते हैं?
दिल में तू है इंकार नहीं, नहीं पता लब्ज-ए-दिल क्या कहते हैं?
इजहार-ए-मोहब्बत कब की कर दी हमने, सुने जवाब-ए-इश्क़ क्या कहते हैं?
बेसब्र बैठे हैं इंतज़ार में अंकुश,  इसे ही पागलपन-ए-इश्क़ क्या कहते हैं?

दिल्लगी कर रहे सनम हमसे, इसे अदा-ए-सनम क्या कहते हैं?
ये अदा भी अजीज हमको, लोग हमसे हमारी नाम-ए-अदा क्या कहते हैं?
संभले जैसे भी तेरे इंकार से, बांधे जो अब भी ज़ंजीर-ए-तमन्ना क्या कहते हैं?
बिन तेरे जीने की दुआ दे दी,  इसे ही दुआ-ए-क़त्ल-ए-मोहब्बत क्या कहते हैं?

इबादत तू, दुआ तेरी कबूल, फकत इतना और बता जा,
कोई पूछे पहचान मेरी तो, एक साँस लेते मुर्दे को क्या कहते हैं?