कब माँगा है मेरी मोहब्बत में तुझसे कुछ,
बस तेरी याद में रोने का हक़ दे दे |
तुझे फिर ना बुलाऊँगा कभी भी, पर
कभी तुझे भूलने का तो वक़्त दे दे |
मानता हूँ मेरी खता है ये चाहत मेरी,
मगर खुदा कभी उस मासूम को भी जन्नत-ए-इश्क़ दे दे |
काबिल तो अपने फन का बनाया है मुझे तूने,
बस दिल के समझदारी और एक दे दे |