अर्ज़ किया है.......
Sunday, November 21, 2010
दीप
एक दीप की तरह हूँ मैं,
जल कर भी तुझे रोशन कर जाऊँगा ।
रखूँगा तेरी दुनिया को प्रकाशित मैं,
नहीं अपने घर अंधरे की सुध मनाऊँगा ।
महकेगी तेरी देहरी मेरी खुशबु से,
बुझ कर भी तुझे काजल दे जाऊँगा ।
एक दीप की तरह हूँ मैं,
जल कर भी तुझे रोशन कर जाऊँगा ।
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)