आज ज़िंदगी थमती जा रही है,
मगर कुछ है जो साँसों की गिनती ख़त्म नही होती |
खामोश है सारा जहाँ, सारी फिजायें,
कहाँ से आती तेरी गूँज है जो मुझे रुकने नही देती |
आज है मेरी आवाज़ किसी कब्र की खामोशी सी,
कैसे शब्द हैं की ज़रूरत-ए-बोल-ए-खुद महसूस नही होती |
नामालूम मकसद-ए-ज़िन्दगी अपना,
मगर तेरे साथ के साथ कोई कमी रूबरू नही होती |
थक गया हूँ सबसे लड़ते लड़ते,
एक तेरा साथ है जो मेरी हार होने नही देता |
शुक्रिया तेरा खुदा मुझे अपनाने का,
अंकुश तेरे बिना ये लम्हा ज़िन्दगी नही होता |