Tuesday, December 27, 2011

ऐ खुदा


आज ज़िंदगी थमती जा रही है,
मगर कुछ है जो साँसों की गिनती ख़त्म नही होती |
खामोश है सारा जहाँ, सारी फिजायें,
कहाँ से आती तेरी गूँज है जो मुझे रुकने नही देती |
आज है मेरी आवाज़ किसी कब्र की खामोशी सी,
कैसे शब्द हैं की ज़रूरत-ए-बोल-ए-खुद महसूस नही होती |
नामालूम मकसद-ए-ज़िन्दगी अपना,
मगर तेरे साथ के साथ कोई कमी रूबरू नही होती |

थक गया हूँ सबसे लड़ते लड़ते,
एक तेरा साथ है जो मेरी हार होने नही देता |
शुक्रिया तेरा खुदा मुझे अपनाने का,
अंकुश तेरे बिना ये लम्हा ज़िन्दगी नही होता |

Monday, December 26, 2011

जब मैं चला जाऊँगा


जो ना रहूं कल मैं तो,
तुम ना आँसू बहाना;
तेरी मुस्कुराहट में जान है मेरी,
एक बात तो मेरी आज़माना|

तेरी खामोशी से तड़प जाता हूँ मैं,
तेरे गम से मर के भी ना चैन पाऊँगा;
कुछ महसूस करो तो साथ बिताए लम्हें करना,
तेरी हँसी में मैं भी गुनगुनाऊँगा;

छोड़ जाना तुझे कैसे मुमकिन होगा
दिल में हूँ तो तेरी सांसो मे भी मुस्कुराऊँगा;
जब मैं चला जाऊँगा...