How can one know it's love or not,
How can one say one forgot.
Whatever it is, it's true,
Either the thought is we or is you.
Saturday, December 19, 2009
Tuesday, December 1, 2009
इश्क़
दिल ने तेरी शान में कुछ फ़रमाया है,
क्यों नादान ने खुद को कलम बनाया है |
लोग भी कैसी चीज़ को इश्क़ कहते हैं,
याद तेरी आई और दिल भर आया है |
करने को तो बहुत दिल्लगी है अंकुश यहाँ,
पर तुझसे दिल्लगी के बाद कहा कुछ बाकी है |
जाना तो इस सफ़र-ए-जिंदगी में था बहुत आगे,
पर कदम रुके जहाँ वहाँ इश्क़ जाम और तू साकी है |
ये कैसे नशे में डूबाया है मुझे,
अब होश तो जैसे जिंदगी और हम बेज़ान हैं |
इस मौत के मज़े भी तुझे कैसे समझाउँ,
खुद के जादू से ए नादान तू अभी अंजान है |
किसी को इस जहाँ में इस जहाँ से ज़्यादा तुझसे मोहब्बत है,
मेरी हक़ीक़त को कैसे तुझे समझाना होगा |
ये सच्चा इश्क़ है, यकीन है मुझे,
खुदा को भी तुझे मुझसे मिलवाना होगा |
क्यों नादान ने खुद को कलम बनाया है |
लोग भी कैसी चीज़ को इश्क़ कहते हैं,
याद तेरी आई और दिल भर आया है |
करने को तो बहुत दिल्लगी है अंकुश यहाँ,
पर तुझसे दिल्लगी के बाद कहा कुछ बाकी है |
जाना तो इस सफ़र-ए-जिंदगी में था बहुत आगे,
पर कदम रुके जहाँ वहाँ इश्क़ जाम और तू साकी है |
ये कैसे नशे में डूबाया है मुझे,
अब होश तो जैसे जिंदगी और हम बेज़ान हैं |
इस मौत के मज़े भी तुझे कैसे समझाउँ,
खुद के जादू से ए नादान तू अभी अंजान है |
किसी को इस जहाँ में इस जहाँ से ज़्यादा तुझसे मोहब्बत है,
मेरी हक़ीक़त को कैसे तुझे समझाना होगा |
ये सच्चा इश्क़ है, यकीन है मुझे,
खुदा को भी तुझे मुझसे मिलवाना होगा |
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