किसी ने हमसे फ़रमाया उन्हें भी शायरी करना सीखना है,
सुना शायरी किसी को अपनी और घसीटना है |
हमने जवाब दिया, एक आप ही तो कला के कद्रदान हैं,
वरना आज के ज़माने में शायर बन किसे जनता से पीटना है |
फिर उनका भोला चेहरा देख के दिल पसीज गया,
और शायर से एक और शेर फिसल गया;
क्या कहूँ दिल की स्याह किस रंग आएगी,
शायरी बनेगी जब उसकी याद तडपाएगी;
मगर मत करना भूल इसे आजमाने की,
मेरी तो मानी नहीं, तेरी वाली भी भाग जाएगी...