मेरे ह्रदय की एक आवाज़ है,
रूप चाहे कितने जता लो तुम इसके,
गहराई जो कल थी, वही आज है |
थोडी बूढी लग रही है तुम्हे आज यद्यपि,
परन्तु आज भी जोश इसका जवाँ है,
कविता को वक़्त के पैमाने पे मत तौल ऐ नादाँ,
तेरे अन्दर की मौज ही इसका फलसफा है |
समर्पित: मेरे एक प्रिय मित्र को, जिसके कुछ मित्रों को कविता का तात्पर्य नही पता |
5 comments:
bahut acche aur shukriya... pahli baar kisi ne kuch samarpit kiya hai mujhe... khushi ke aansoo nikal pade :P
bahut acche aur shukriya... pahli baar kisi ne kuch samarpit kiya hai mujhe... khushi ke aansoo nikal pade :P
सुन्दर कविता.
kavita mein gehrai hai aur nisanshay hi ye tumhare dil ki aawaz hai !
thanks to all :)
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