Monday, July 4, 2016

समझ नहीं आती

तेरी आँखों की मस्ती मुस्कुराती है मुझे,
लम्हा-ऐ-अलविदा पे तेरी ख़ामोशी समझ नहीं आती॥

सर-आँखों पे तेरा इंकार ऐ दिलरुबा,
मेरे किस्से पे शर्माती तेरी नजरें समझ नहीं आती॥

कहा था तुमने चल न सकोगी उम्र भर साथ मेरे,
साथ चले मीलों जिसपे हम, वो राह समझ नहीं आती॥

समझता हूँ तेरे शब्दों को बखूब मैं,
शब्दों से इतर तेरी भंगिमाएं समझ नहीं आती॥

ये शर्माते जज्बात हैं या दीवानापन मेरा,
मेरे दिल को अदा-ऐ-महबूब समझ नहीं आती॥

समझता हूँ मर्ज़-ऐ-इश्क़ और इलाज़ भी जनता हूँ,
तू मरीज़-ऐ-इश्क़ नहीं ये बात समझ नहीं आती॥

तेरे इंकार से संभल रहा मैं, बदल रहा मैं,
तेरे न बदलने की वजह सिवाय इश्क़ के समझ नहीं आती॥


अनुलेख: मैं मुंशी प्रेमचंद जी का हमेशा से प्रंशसक रहा हूँ। मुंशीजी की लेखनशैली में आप तत्कालीन भाषा या कहा जाए तो बोली का प्रयोग पाएंगे। मुंशीजी ने किसी सिर्फ हिंदी या उर्दू का प्रयोग ना करते हुए आमजन की भाषा में साहित्य की रचना की। आज की ये ग़ज़ल भी मैंने उसी तरह हिंदी और उर्दू के प्रचलित शब्दों द्वारा लिखी है। रचना में इतना भाषा का मिश्रण पहली बार किया है अतः गलतियाँ सम्भविक हैं। Please feel free to note down any comment you have...



Saturday, April 30, 2016

क्या कहते हैं

आज शब्द नहीं लिखने को, नहीं पता जज्बात क्या कहते हैं?
दिल में तू है इंकार नहीं, नहीं पता लब्ज-ए-दिल क्या कहते हैं?
इजहार-ए-मोहब्बत कब की कर दी हमने, सुने जवाब-ए-इश्क़ क्या कहते हैं?
बेसब्र बैठे हैं इंतज़ार में अंकुश,  इसे ही पागलपन-ए-इश्क़ क्या कहते हैं?

दिल्लगी कर रहे सनम हमसे, इसे अदा-ए-सनम क्या कहते हैं?
ये अदा भी अजीज हमको, लोग हमसे हमारी नाम-ए-अदा क्या कहते हैं?
संभले जैसे भी तेरे इंकार से, बांधे जो अब भी ज़ंजीर-ए-तमन्ना क्या कहते हैं?
बिन तेरे जीने की दुआ दे दी,  इसे ही दुआ-ए-क़त्ल-ए-मोहब्बत क्या कहते हैं?

इबादत तू, दुआ तेरी कबूल, फकत इतना और बता जा,
कोई पूछे पहचान मेरी तो, एक साँस लेते मुर्दे को क्या कहते हैं?

Monday, March 28, 2016

तुझसे न मिल के ही अच्छे था मैं,
मिल के कुछ और खाली सा लगता है;
पहले बस प्यार ही तो नहीं था ज़िन्दगी में,
अब खुद को खुद अधूरा सा लगता है... 

Sunday, March 13, 2016

नादान परिंदा

देख के तुझे जी रहे,
तेरी यादों से ही ज़िंदा हैं;
देख के भी मिल न सके,
हम खुद से ही शर्मिंदा हैं;
हाथों में लिए हाथ तेरा,
तेरी खुशबू भरी साँसों में;
तस्वीर को मान हकीक़त भटक रहा,
दिल भी कैसा नादान परिंदा है... 

Thursday, February 18, 2016

Companion of Night

Moon amidst of cloud Cirrus,
In clear sky with full of stars,
like a alone warrior in the war;
Its beauty, oh beauty!! oh almighty!
Tells you are with me, though so far.

Sword of Hercules and blessing of Saptarshi,
In calmness of night and majesty of sky,
Seems some glimpse of Milkway down the path;
I couldn't walk but I will fly,
Sings the breeze with music of guitar,
Its beauty, oh beauty!! oh almighty!
Tells you are with me, though so far.

ईश्वर ने शयन को बनायी प्यारी रात,
और जिन्हें जागना होता रात में, 
उनके लिए अनंत अनुपम आकाश। 

Sunday, July 21, 2013

कभी सोचा ना था इतने  अकेले हो जायेंगे,
अपनों की भीड़ में कही खो जायेंगे;
अपनों के साथ देखे जो सपने थे मैंने ,
वो सपने मेरी गीली आँखों में सो जायेंगे..

Sunday, October 21, 2012

डर लगता है...


खो चूका हूँ इतना कुछ मैं की
अब मिलने की आस से डर लगता है।

ठुकराया गया हूँ कुछ इस तरह की
अब चाहत की चाह से डर लगता है।

दिल में मेरे मोहब्बत-ए-जहाँ है तो क्या
रुसवाई-ए-हुस्न से डर लगता है।

खायी है ठोकर इस राह में कुछ ऐसी की
राह-ए-मोहब्बत में नज़र से डर लगता है।

डर नहीं मुझे मेरे दास्ताँ-ए-दिल बयां करने का
उनके तेरे आँखों का पानी बन जाने से डर लगता है।

Saturday, October 6, 2012

Lost

Suddenly when everything stops and no spree
Hold my hand and whisper to me,
"Idiot! I always was and I always be;
Nothing here I am living for
but the smile you threw to me"

Today everything is stopped and no spree,
Then why no signs from you I can see.
Forgotten I am breathing for you,
You are so far where I cannot be.

I have hope you will return,
I have hope to get the clue;
The clue which will prove
that you cannot forgot me,
that the love, our love is true.

Tuesday, December 27, 2011

ऐ खुदा


आज ज़िंदगी थमती जा रही है,
मगर कुछ है जो साँसों की गिनती ख़त्म नही होती |
खामोश है सारा जहाँ, सारी फिजायें,
कहाँ से आती तेरी गूँज है जो मुझे रुकने नही देती |
आज है मेरी आवाज़ किसी कब्र की खामोशी सी,
कैसे शब्द हैं की ज़रूरत-ए-बोल-ए-खुद महसूस नही होती |
नामालूम मकसद-ए-ज़िन्दगी अपना,
मगर तेरे साथ के साथ कोई कमी रूबरू नही होती |

थक गया हूँ सबसे लड़ते लड़ते,
एक तेरा साथ है जो मेरी हार होने नही देता |
शुक्रिया तेरा खुदा मुझे अपनाने का,
अंकुश तेरे बिना ये लम्हा ज़िन्दगी नही होता |

Monday, December 26, 2011

जब मैं चला जाऊँगा


जो ना रहूं कल मैं तो,
तुम ना आँसू बहाना;
तेरी मुस्कुराहट में जान है मेरी,
एक बात तो मेरी आज़माना|

तेरी खामोशी से तड़प जाता हूँ मैं,
तेरे गम से मर के भी ना चैन पाऊँगा;
कुछ महसूस करो तो साथ बिताए लम्हें करना,
तेरी हँसी में मैं भी गुनगुनाऊँगा;

छोड़ जाना तुझे कैसे मुमकिन होगा
दिल में हूँ तो तेरी सांसो मे भी मुस्कुराऊँगा;
जब मैं चला जाऊँगा...

Monday, September 5, 2011

सच

आज हर भीड़ का हिस्सा हूँ मैं,
कोई 'अपने' गैरों में गिने तो चैन आये |

मेरे मुस्कराहट की कायल है दुनियाँ
कोई जी भर के रुला जाए तो चैन आये |

बहुत हसीन तस्वीर है यादों की मेरे पास,
कोई उनमे रंग भर दे तो चैन आये |

मीठी धुनें गूंजती हैं चहुं और, 
कोई सच्ची डांट सुना जाए तो चैन आये |

मीठी नींद की गोद में होती है रात मेरी,
कोई बेवक्त जगा जाए तो चैन आये |

बड़ी तल्लीनता से कट रहें हैं दिन अब,
कोई घड़ी भर भी बैचेन कर जाए तो चैन आये |

Tuesday, August 16, 2011

शायरी

किसी ने हमसे फ़रमाया उन्हें भी शायरी करना सीखना है,
सुना शायरी किसी को अपनी और घसीटना है |
हमने जवाब दिया, एक आप ही तो कला के कद्रदान हैं,
वरना आज के ज़माने में शायर बन किसे जनता से पीटना है |


फिर उनका भोला चेहरा देख के दिल पसीज गया,
और शायर से एक और शेर फिसल गया;

क्या कहूँ दिल की स्याह किस रंग आएगी,
शायरी बनेगी जब उसकी याद तडपाएगी;
मगर मत करना भूल इसे आजमाने की,
मेरी तो मानी नहीं, तेरी वाली भी भाग जाएगी...

Tuesday, July 26, 2011

दिल चाहता है

बहुत कर चुका हूँ गुनाह की अंकुश,
अब सज़ा पाने को दिल चाहता है |

करता रहा कोशिश आँखों में डूब जाने की,
अब तेरी यादों को भूल जाने को दिल चाहता है|

बहुत मासूम है ये इश्क़ मेरा,
अब समझदार बनने को दिल चाहता है|

इस दिल्लगी से खुशी तो मिली हमें,
अब शान-ए-वीराने को दिल चाहता है|

दीवानगी-ए-दिल तो बहुत समझ ली,
अब अदा-ए-अक़ल पाने को दिल चाहता है|

कितना नासमझ है ये दिल मेरा,
लाख बहलाने के बावजूद तुझे दिल चाहता है...

Wednesday, April 20, 2011

आज चाँदनी से बात की मैंने


आज चाँदनी से बात की मैंने,
धूँधली सी है वो,
मेरा साथ देने में असमर्थता जताती।
या फ़िर अपनी निष्ठा जताती,
कर प्रकाशित मेरी राहों को,
लाख़ रुकावटों से लड़ते।
प्रश्न होते तुच्छ सभी ये,
जब दृष्टिगत है मेरे वो...

Monday, February 21, 2011

एकाकी यात्रा


13-Feb-2011
आखिरी semester कि एक सर्द सुबह । आज बहुत दिनों बाद सुबह जल्दी नींद खुली और ये संयोग व्यर्थ नहीं हुआ । बहुत दिनों बाद मौसम दीवाना हो रहा है और इतना दीवाना कि जैसे सोलानी बार बार मुझे अपने पास बुला रही हो । जब कुछ दोस्तों ने नींद का साथ छोड़ने से इनकार कर दिया, तो फिर और अधिक समय बर्बाद ना करते हुए मैं अपनी द्विपथगामनी (bicycle)  के साथ सोलानी यात्रा पे हो लिया । 
बहुत दिनों से सोलानी मे जा के कविता लिखने कि जो इच्छा थी, वो भी आज पूरी कर ली। वहाँ जा के जो कविता लिखी, वही इस post पे डाल रहा हूँ। और जिन दोस्तों ने वो शानदार सुबह व्यर्थ की, उनके लिये सहानभूति।



आज क्यों अकेले इन राहों पे हो,
इस मासूम सवाल का क्या ज़वाब दूँ ।
संग लिये तेरी यादें चला हूँ,
और हमराही तन्हाई को कैसे भुला दूँ ।

अब तो राहें सोचती हैं मैं क्या करुँगा यहाँ,
पर क्या अकेला इन राहों पे चलुँगा नहीं?
फ़िर गुज़र रहा हूँ इन रास्तों से,
अब कोई याद भूलूँगा नहीं ।

बुलावा तो मुझे मदहोश मौसम का है,
मेहमाननवाजी भी क्या खूब दीवानी है,
फ़िर धीरे से कान में ये क्यों कह गयी हवा,
अधूरे अंकुश के लिए क्यों मेरी रवानी है?

नीर का उत्साह तो किसी से कम नहीं,
गीत ये भांति भांति के गुनगुना रहा,
कितना सुकुन है इस तन्हाई में,
इस बात को यहीं तो समझ पा रहा ।

ये तन्हाई तो एक भाव मात्र है,
ज़ीवन को बाँधे ऐसी दशा तो नहीं,
अंकुश ऐसे जियो कि गम को लगे,
उसके वज़ूद कि कोई वज़ह नहीं।

Friday, December 24, 2010

Yourself

I like to see you bawling,
I like to see your fluster,
I like to see you bedeviled,
I like to face your anger,

I like to see you listless,
I like to know your boo,
B‘coz not I like the truth,
But I love to meet yourself in you.

Sunday, November 21, 2010

दीप

एक दीप की तरह हूँ मैं,
जल कर भी तुझे रोशन कर जाऊँगा ।
रखूँगा तेरी दुनिया को प्रकाशित मैं,
नहीं अपने घर अंधरे की सुध मनाऊँगा ।
महकेगी तेरी देहरी मेरी खुशबु से,
बुझ कर भी तुझे काजल दे जाऊँगा ।
एक दीप की तरह हूँ मैं,
जल कर भी तुझे रोशन कर जाऊँगा ।

Wednesday, September 8, 2010

She

I know how to rule the world,
But she taught me to win hearts;

I know how to hide my grief,
But she taught me to come over it;

I know how to enjoy myself,
But she taught me to feel it;

I know how to live in the world,
But she taught me to make it livable;

I know how to love others,
But she taught me to be lovable;

I know how to apologize,
But she taught me to say sorry;

I know how to be polite,
But she taught me to be humble;

I know how to be independent,
But she taught me to understand people;

I know how to love someone,
But she taught me to respect distances;

I know how to keep you in heart always,
But she taught me how to let one go;

I know how to get her,
But she betrayed her dreams to me.

Sunday, September 5, 2010

परदा-ए-हया

समझता हूँ तू मेरा साथ नही दे सकती,
कारवाँ अपनी यादों का अपने साथ ले जाती |

जानता हूँ कैसे बहलाना है दिल को,
मगर, मासूम को यूँ मचला ना जाती |

पता है मिलने की वजह नही कोई,
ख्वाबों मे आना तो बंद कर जाती |

नही मुनासिब तेरी ज़ुबान से ताले गिरना
तन्हाइयों को मेरी अपनी आवाज़ तो ना दे जाती |

वाक़िफ़ हूँ तेरी मजबूरी से मैं भी,
प्यार में मुझे मजबूर तो ना कर जाती |

याद है कसम-ए-दूरी तेरी मुझे भी,
इंतकाल-ए-कसम कभी तो कर जाती |

सुना है मैंने इश्क़ नाम है दर्द का,
इस दर्द को इतना मीठा ना बना जाती |

मुमकिन नही रुसवाँ परदा-ए-हया दरमियाँ हमारे,
फिर बेहया मुझे बेदर्द जमाने में ना कहलवा जाती |

Saturday, June 26, 2010

सपना

कैसी ये मतवाली रात आई है,
तन्हा नहीं मेरी तन्हाई है |
ख़्वाहिश एक अपने की थी मन में,
तू क्यूँ मेरी यादों में चली आई है |

जब देखा है यादों के झरोखों से,
हर बार मैनें तेरी ही सूरत ही पायी है |
तू ही बता कितना वाज़िफ है वहम मेरा,
सुना है मेरी परछाई ने कल तेरे सपनों मे जगह पायी है ।