I'm strong to let you go
I'm weak to never show
I'm good enough to be
But, I'm fool to me
I'm the way you would like
I'm me from inside,
I'm different in every movement though,
I'm always you for you.
Monday, April 26, 2010
Wednesday, March 17, 2010
खता
कब माँगा है मेरी मोहब्बत में तुझसे कुछ,
बस तेरी याद में रोने का हक़ दे दे |
तुझे फिर ना बुलाऊँगा कभी भी, पर
कभी तुझे भूलने का तो वक़्त दे दे |
मानता हूँ मेरी खता है ये चाहत मेरी,
मगर खुदा कभी उस मासूम को भी जन्नत-ए-इश्क़ दे दे |
काबिल तो अपने फन का बनाया है मुझे तूने,
बस दिल के समझदारी और एक दे दे |
बस तेरी याद में रोने का हक़ दे दे |
तुझे फिर ना बुलाऊँगा कभी भी, पर
कभी तुझे भूलने का तो वक़्त दे दे |
मानता हूँ मेरी खता है ये चाहत मेरी,
मगर खुदा कभी उस मासूम को भी जन्नत-ए-इश्क़ दे दे |
काबिल तो अपने फन का बनाया है मुझे तूने,
बस दिल के समझदारी और एक दे दे |
Saturday, December 19, 2009
Tuesday, December 1, 2009
इश्क़
दिल ने तेरी शान में कुछ फ़रमाया है,
क्यों नादान ने खुद को कलम बनाया है |
लोग भी कैसी चीज़ को इश्क़ कहते हैं,
याद तेरी आई और दिल भर आया है |
करने को तो बहुत दिल्लगी है अंकुश यहाँ,
पर तुझसे दिल्लगी के बाद कहा कुछ बाकी है |
जाना तो इस सफ़र-ए-जिंदगी में था बहुत आगे,
पर कदम रुके जहाँ वहाँ इश्क़ जाम और तू साकी है |
ये कैसे नशे में डूबाया है मुझे,
अब होश तो जैसे जिंदगी और हम बेज़ान हैं |
इस मौत के मज़े भी तुझे कैसे समझाउँ,
खुद के जादू से ए नादान तू अभी अंजान है |
किसी को इस जहाँ में इस जहाँ से ज़्यादा तुझसे मोहब्बत है,
मेरी हक़ीक़त को कैसे तुझे समझाना होगा |
ये सच्चा इश्क़ है, यकीन है मुझे,
खुदा को भी तुझे मुझसे मिलवाना होगा |
क्यों नादान ने खुद को कलम बनाया है |
लोग भी कैसी चीज़ को इश्क़ कहते हैं,
याद तेरी आई और दिल भर आया है |
करने को तो बहुत दिल्लगी है अंकुश यहाँ,
पर तुझसे दिल्लगी के बाद कहा कुछ बाकी है |
जाना तो इस सफ़र-ए-जिंदगी में था बहुत आगे,
पर कदम रुके जहाँ वहाँ इश्क़ जाम और तू साकी है |
ये कैसे नशे में डूबाया है मुझे,
अब होश तो जैसे जिंदगी और हम बेज़ान हैं |
इस मौत के मज़े भी तुझे कैसे समझाउँ,
खुद के जादू से ए नादान तू अभी अंजान है |
किसी को इस जहाँ में इस जहाँ से ज़्यादा तुझसे मोहब्बत है,
मेरी हक़ीक़त को कैसे तुझे समझाना होगा |
ये सच्चा इश्क़ है, यकीन है मुझे,
खुदा को भी तुझे मुझसे मिलवाना होगा |
Friday, October 23, 2009
कविता
मेरे ह्रदय की एक आवाज़ है,
रूप चाहे कितने जता लो तुम इसके,
गहराई जो कल थी, वही आज है |
थोडी बूढी लग रही है तुम्हे आज यद्यपि,
परन्तु आज भी जोश इसका जवाँ है,
कविता को वक़्त के पैमाने पे मत तौल ऐ नादाँ,
तेरे अन्दर की मौज ही इसका फलसफा है |
समर्पित: मेरे एक प्रिय मित्र को, जिसके कुछ मित्रों को कविता का तात्पर्य नही पता |
Saturday, September 12, 2009
फरमाइश
ये सिर्फ़ रात का तक़ाज़ा नही
आज मौसम की अगुआईश है |
तन्हाई की अपनी क्या ही बात करूँ
हमेशा ही करी उसकी आज़माइश है |
आज तो कलम भी मेरी पूछ पड़ी
आज उसने भी की फरमाइश है |
दफ़्न कर दूँ हाल-ए-दिल दिल में अपने
ऐसी कहाँ इस इश्क़ की पैदाइश है |
कहने पे उनके लिख तो दिया आज मैंने फिर
कर दी पूरी फरियाद उनकी पूरी, मेरे में क्यों बाकी गुंजाइश हैं |
आज मौसम की अगुआईश है |
तन्हाई की अपनी क्या ही बात करूँ
हमेशा ही करी उसकी आज़माइश है |
आज तो कलम भी मेरी पूछ पड़ी
आज उसने भी की फरमाइश है |
दफ़्न कर दूँ हाल-ए-दिल दिल में अपने
ऐसी कहाँ इस इश्क़ की पैदाइश है |
कहने पे उनके लिख तो दिया आज मैंने फिर
कर दी पूरी फरियाद उनकी पूरी, मेरे में क्यों बाकी गुंजाइश हैं |
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