Sunday, September 28, 2008

आज वो मेरे पलकों के इशारों में है,
आज वो मेरे इश्क के मजारों में है,
उन्हें पता नही लेकिन, उनकी यादें
आज मेरे अश्कों के दीवारों में है|

2 comments:

महेन्द्र मिश्र said...

निरन्तर: नए ब्लागों और ब्लॉग जगत के नए हस्ताक्षरों का परिचय पर चर्चा

Ankush Agrawal said...

मैं आपका तात्पर्य नहीं समझा