आज कुछ लिखना चाहता हूँ, पर कलम उदास है,
आज कुछ कहना चाहता हूँ, पर शब्द नहीं मेरे पास है,
आज कुछ करना चाहता हूँ, पर जज्बा नहीं मेरे पास है,
आज कुछ कदम चलना चाहता हूँ, पर हमराही नहीं मेरे साथ है,
आज ये तन अकेला और मन में उसकी याद है,
आज मूर्त वो मेरे मन मंदिर की और दिल में जगी फरियाद है,
आज वो चाहिए और नहीं कोई मुराद है,
आज उसके लिए फिर जी जाऊं, बिन उसके मरना तो बर्बाद है,
आज का नहीं ये तो मेरे हर जन्म का राज है,
आज हो या कल वो ही मेरी कलम की प्रेरणा,मेरा हौसला,मेरी साथी और मेरी आवाज़ है,
आज एक बार फिर आ जाओ मेरे पास,
आज मेरे सूखे जीवन में फिर कर दो हरियाली,
आज अमावस की रात सी काली हो चुकी है जिंदगी मेरी,
आज बन जाओ रोशनी और कर दो उसे जगमग दिवाली,
आज पुकार तुम्हे रहा है, दिल ये मेरा बेचारा है,
आज भूल मत इसे जिसका तू एकमात्र सहारा है,
आज क्या वो आज पुराना हो गया, जिस
आज में दूजे की एक आह पे भी तड़प जाया करते थे हम,
आज क्या वो आज आ गया, जिस
आज में एक - दूजे के बारे में जानेंगे भी ना हम,
आज वादा करता हूँ तुमसे कभी ना बिछुड़ने का,
आज वादा करता हूँ तुमसे कभी ना दगा करने का,
आज भले ही तुम मुझे भूल गयी हो, पर
आज नहीं तो कल तुम्हे तुमसे फिर चुरा लेने का|
1 comment:
Tareef to teri karna chahu,
Alfaz nahi hain paas mere!
Pata nahi hamko tha abtak,
Hai andar jo kuch khas tere!
Sachmuch teri kavita itni acchi thi ki padhte padhte ye 4 lines compose kar dali maine..
Bahut acche!
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