Tuesday, May 26, 2009

ना डर मासूम झूठ के लिए अंकुश,
वो खुदा सच का है,
वो खुदा इश्क़ का है |

Sunday, May 10, 2009

मैं थोड़ा बिगड़ना चाहता हूँ,
मैं थोड़ा सुधरना चाहता हूँ, 
पता नही कैसे करूँगा, मगर
इस दुनियाँ में मैं जीना चाहता हूँ |

Sunday, April 26, 2009

अनजान

आज फिर रुत मस्त, मध्दम हवा और मौसम मस्ताना है,
जज्बाती कहो या दिवाना मगर दिल ने छेड़ा तराना है |
आशिक़ी मे डूबा हूँ, बस इश्क़ का फसाना है,
वो आज है यही, और उसे दिल का हाल बताना है |
कैसे कहूँ तुम्हे, तुम्हे अपना बनाना है,
जानती तो हो फिर क्यों ये अंदाज-ए-अंजाना है |
रुक जाओ दो पल, अभी तो सुहानी शाम का आगाज़ है,
पर बात शुरू करूँ कैसे, पढ़ लो इन आँखों को जो कहती यही राज है |
तुम हो मेरी और नही कोई सनम तुम्हारा दूजा है,
चाहता हूँ ले लूँ बाहों मे उसे, जो मेरी प्रियतमा मेरी पूजा है |
पर इस पूजा की सफलता क्यों आसान नही है,
तप किया है मैने पर पाया क्यों वरदान नही है |
वो फिर दूर है मुझसे, भले ही तुम्हे दिख पास रही है,
कोई है तरीका तो बताए मुझे, मुझे तो नही कोई आस रही है |
कह लो तुम मुझे अकेला, पर अकेला कहा मैंने कभी खुद को पाया है,
खुशी मिले है उसे जहाँ की तो मैने भी गम को आजमाया है |
कहने को तो आज बिल्कुल तन्हा हूँ, पर साथ मेरे सच्ची साथी तन्हाई है,
फ़िक्र ना कर ऐ मासूम मेरे लिए, ये पहली दफ़ा नही उसकी रुसवाई है |
सोचा था उससे दूर जाने का, दिल ने कुछ चैन पाने का,
मगर दिल ने ये कैसा मर्ज़ लिया है, उसके बिन नही जी पाने का |
ये मोहब्बत है दोस्त मेरे, जो कहाँ किसी को समझ आई है,
जो कभी झुका नही उसने कहा की ये पढ़ाई है |
ये आँखों की भाषा पढ़ना नही कोई खेल है
ये कोई सस्ता सौदा नही दो दिलों का मेल है |
कैसे कह दूँ की तुम्हारे प्यार मे ही अंकुश  डूबा है,
कहीं रूठ गयी तुम तो तुम्हारे सिवा नही मेरा कोई दूजा है |
पता नही मेरी बातों को तुम कब समझ पाओगी,
मेरे सच्चे प्यार को कब सफल करवाओगी,
दिल की बात को होठों पे लाना ज़रूरी नही,
बस तुम्हें चाहना है, तुम्हे पाना ज़रूरी नही...

Tuesday, April 21, 2009

हमने तो ना की थी कोई खता,
मगर तुम्हारी नादानी पर मेरा कोई ज़ोर नही,
चाँद तो आज भी निकला था हमारी मोहब्बत की शान में,
मगर बादलों की घटा पे किसी का ज़ोर नही |
गम को मेरे खुशी मे बदल जाने दे,
बहते है आँसू तो बह जाने दे, 
बदल जाएँगे मोतियों में अश्क मेरे,
तू बस अपने हाथों को सीप बन जाने दे |

Thursday, April 16, 2009

रहते हैं वो किसी के ख्यालों में पर कहते हैं मुझे किसी की याद नही,
भेजते हैं किसी को संदेश पर कहते हैं कोई ख़ास नही,
पूछते हैं हाल उनका सबसे और कहते हैं कोई वैसी बात नही,
बताता हूँ उन्हे ये प्यार है जनाब, तो कहते हैं, 
किसी से  बयाँ हो जाए, प्यार इतना सस्ता ज़ज्बात नही |

Sunday, March 29, 2009

आज

आज कुछ लिखना चाहता हूँ, पर कलम उदास है,
आज कुछ कहना चाहता हूँ, पर शब्द नहीं मेरे पास है,
आज कुछ करना चाहता हूँ, पर जज्बा नहीं मेरे पास है,
आज कुछ कदम चलना चाहता हूँ, पर हमराही नहीं मेरे साथ है,
आज ये तन अकेला और मन में उसकी याद है,
आज मूर्त वो मेरे मन मंदिर की और दिल में जगी फरियाद है,
आज वो चाहिए और नहीं कोई मुराद है,
आज उसके लिए फिर जी जाऊं, बिन उसके मरना तो बर्बाद है,
आज का नहीं ये तो मेरे हर जन्म का राज है,
आज हो या कल वो ही मेरी कलम की प्रेरणा,मेरा हौसला,मेरी साथी और मेरी आवाज़ है,
आज एक बार फिर आ जाओ मेरे पास,
आज मेरे सूखे जीवन में फिर कर दो हरियाली,
आज अमावस की रात सी काली हो चुकी है जिंदगी मेरी,
आज बन जाओ रोशनी और कर दो उसे जगमग दिवाली,
आज पुकार तुम्हे रहा है, दिल ये मेरा बेचारा है,
आज भूल मत इसे जिसका तू एकमात्र सहारा है,
आज क्या वो आज पुराना हो गया, जिस
आज में दूजे की एक आह पे भी तड़प जाया करते थे हम,
आज क्या वो आज आ गया, जिस
आज में एक - दूजे के बारे में जानेंगे भी ना हम,
आज वादा करता हूँ तुमसे कभी ना बिछुड़ने का,
आज वादा करता हूँ तुमसे कभी ना दगा करने का,
आज भले ही तुम मुझे भूल गयी हो, पर
आज नहीं तो कल तुम्हे तुमसे फिर चुरा लेने का|